कोयला कारोबार में खलल डालने पर गर्भवती महिला अनिता की पीट पीट कर की गई हत्या कांड की सच्चाई जानने आज भाकपा माले नेताओं की फैक्ट फाइंडिंग टीम अनीता देवी के घर पहुँची।
भाकपा माले माले नेताओं ने जांच पड़ताल के बाद प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि बेरमो के फुसरो 5 नंबर धौडा में कोयला का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है। इस अवैघ कारोबार में अधिकारी, नेता से लेकर प्रशासन तक हमाम में सब नंगे हैं। इस धंधे के कारोबार के हेड मुखिया को नाम से नहीं बॉस कहकर पुकारा जाता है। बॉस का जलवा ऐसा है कि किसी को भी कुछ भी कर दे कोई सुनने वाला नहीं है।
अनीता देवी भी रेलवे साइडिंग के इसी मुहल्ले में रहती है। जो पूरे मुहल्ले में ग्रेजुएशन (कॉमर्स) की हुई एक मात्र पढ़ी लिखी महिला थी जो शिक्षक बन कर गरीब दलित घरों में शिक्षा की ज्योत जलाने की इरादे से आगे बढ़ रही थी। सामाजिक गतिविधियों में भी इनकी भूमिका रहती थी।
इनके गांव की ही सहेली यहां आकर कोयला चुनकर अपना जीविका चलाती थी घटना के दिन पहले कोयला चोर गिरोह की भिड़ंत अनीता की सहेली से ही हुई थी। उनको बचाने के लिए उनके साथ खड़ी होने की वजह से ही गिरोह के लोग अनिता के साथ उलझ गए। हल्ला सुनकर बचाने गए घर के लोगों के साथ भी मार पिटाई की गई। कोयला चोर गिरोह के संजय भुईयां, अरविंद भुईयां, गणेश भुईयां रोशन भुईयां, ओम कुमार भुईयां, सुनील भुईयां, आदि ने गिरोह के सरगना के उकसाने पर मारपीट की जगह से थोड़ी दूर ले जाकर बेदम पिटाई की गई।
अनीता के पेट पर लात घुसे से पिटाई की गई, जिससे गर्भवती अनीता के पेट में पल रहा बच्चे की भी मौत हो गई।
भाकपा माले नेताओं ने आरोप लगाया कि अनीता देवी की मौत सामान्य घटना नहीं है बल्कि संगठित अपराधिक गिरोह द्वारा योजना बद्ध तरीके से की गई हत्याकांड है। उन्होंने कथित मुख्य सरगना संतोष साव समेत सभी दोषियों को कड़ी सज़ा दिलाने की माँग की।
पार्टी के बयान के अनुसार भाकपा माले राज्य सरकार से मांग करती है कि संगठित अपराधिक गिरोह द्वारा गठित घटना जैसे मानव तस्करी के मामले में होती है उसी तरह का लाभ मृतक अनीता देवी के आश्रित को भी 25 लाख रूपये मुआवजा का भुगतान किया जाए। मामले में कोई कोताही या लापरवाही हुई तो बेरमो को कोयला चोरों से बचाने की मुहिम तेज होगा।
फैक्ट फाइंडिंग टीम में भाकपा माले राज्य स्थाई कमिटी सदस्य भूवनेश्वर केवट, जिला कमिटी सदस्य बालेश्वर गोप, मजदूर नेता बालगोविंद मंडल, राज केवट आदि मुख्यरूप से शामिल थे।
(जनचौक ब्यूरो)